Hindi Blog Posts


PICT1333[3]
अब पछतावे होत का जब चिडिया चुग गयी खेत

Sep 26, 2010

जब भी किसी काम को करने का इरादा करो, लिखने या बोलने का इरादा करो, तो पहले हज़ार बार, सोचो , उसके नतीजे के बारे में.  इंसान की कुछ परेशानियाँ, उसके अपने इख़्तियार से बाहर होती हैं जैसे सैलाब व…

Continue >>

महिलाओं की स्वतंत्रता और मुल्ला का फतवा

Sep 26, 2010

अभी कुछ दिन पहले मैंने एक लेख़ लिखा था, इंसान के दो चेहरे क्यों? उसमें मैंने उदाहरण  दिया था, हर धर्म यह में हुक्म है औरतों के लिए कि अपने बालों को और जिस्म को ग़ैर (ना महरम) मर्द से छिपाओ" और…

Continue >>

मैंने मौत को करीब से देखा है

Sep 24, 2010

  मौत हर समय इंसान का पीछा करती रहती है और इंसान हमेशा मौत से भागता दिखाई देता है. आज तक कोई विज्ञान, यह नहीं बता पाया की किसी को मौत कब आएगी, कहां आएगी, कैसे आएगी? हर दिन हम किसी ना किसी की मौत…

Continue >>

इंसान के दो चेहरे क्यों?

Sep 23, 2010

हम जिस समाज में रहते हैं उसमें इंसानों के अक्सर दो चेहरे दिखने में आते हैं.  अमीर अपने काले धन में से राई बराबर धन किसी संस्था में दे के टैक्स भी बचाता है और दानवीर भी बन जाता है, …

Continue >>

धर्म चाहे वोह कोई भी हो उसका रंग सफ़ेद होता है

Sep 21, 2010

चिदम्बरम् जी ने भगवा आतंक , किसी समूह विशेष की आतंकवादी हरकतों को देख के , यह नाम दे दिया . हरा आतंक सुना, अब भगवा भी सुन लिया, और ना जाने कितने रंगों  को इस आतंकवाद से जुड़ना बाकी है. मेरा…

Continue >>

युवा अपने मित्रों का अनुसरण बड़ी जल्दी करने लगता है

Sep 21, 2010

किशोरों की प्राय: यह शिकायत रहती है कि माता पिता और अन्य बड़े लोग हमारी भावनाओं एवं इच्छाओं को समझते नहीं हैं, वे अपने विचारों को हमपर थोपते हैं, और वहीं दूसरी ओर माता- पिता अपने युवाओं के व्यवहार…

Continue >>

यह भी सत्य है..लेकिन वो भी सत्य है

Sep 19, 2010

बिना आपको आदर दिए , हर इंसान आपसे यह उम्मीद रखता है,कि आप उसका आदर करें  ! एक भुलावा लेकर हम जीते रहते हैं कि हम आदर सम्मान के पूर्ण योग्य हैं ! हम यह सोचने का प्रयत्न क्यों नहीं करते कि सम्मान,…

Continue >>

विवाह का प्रचलन, समाज के कल्याण की ज़मानत है

Sep 15, 2010

विवाह का प्रचलन, समाज के कल्याण की ज़मानत है।विवाह  का ना होना या देर से होना बहुत सी बुराईयों  को जन्म देता है। आज हमारे समाज मैं विवाह दर मैं कमी आने लगी है और देर से विवाह तो एक आम बात…

Continue >>

मुसलमानों के खलीफा हज़रत अली की शहादत कैसे हुई ?

Sep 15, 2010

हमारे एक ब्लॉगर भाई अनवर  जमाल साहब ने इस बात पे ज़ोर दिया की मैं हज़रत अली (अ.स) की शहादत कैसे हुई इस बात पे कुछ रौशनी डालूँ.  हजरत अली (र अ) की शहादत से पहले , ज़रा उनका तार्रुफ़ भी…

Continue >>

स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पे व्यभिचार

Sep 12, 2010

बचपन से सुना और पढ़ा . मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, समाज मैं रहने के लिए अच्छे चरित्र, शील, सद्व्यवहार, ईश्वर से व्यावहारिक संबंध, सदाचार आदि की आवश्यकता हुआ करती है. किसी भी समाज के स्थायित्व

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s